उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती घोटाला मामला, जानिए पूरा मामला

उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती घोटाला मामला, जानिए पूरा मामला

उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। एक तरफ जहां सरकार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ शिक्षक अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर तमाम तरह की अड़चनों के बीच एक महीने से आरक्षण घोटाले का आरोप लगाते हुए लखनऊ के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन कर रहे हैं।

बता दें कि उत्तर प्रदेश में पिछले साल बेसिक शिक्षा विभाग ने 69000 शिक्षकों की भर्ती की थी. आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का आरोप है कि इसमें आरक्षण घोटाला हुआ है. अभ्यर्थियों का कहना है कि ओबीसी वर्ग को इस भर्ती में 27 फीसदी की जगह 4 फीसदी से भी कम आरक्षण मिला. ऐसा ही एससी वर्ग के साथ हुआ. भर्ती में जांच की मांग को लेकर ओबीसी और एससी वर्ग के अभ्यर्थी लगातार विरोध कर रहे हैं.

अभ्यर्थियों का कहना है कि 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती के मामले में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को भेजी. इस अंतरिम रिपोर्ट में कहा गया कि 5,844 सीटों के आरक्षण में अनियमितताएं हुई हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि OBC वर्ग को 21% आरक्षण नही मिला और उन्हें अपने कोटे की 18,598 सीट में से केवल 2,637 सीट ही दी गई. हालांकि, सरकार ने अब तक इस रिपोर्ट पर कोई जवाब नहीं दिया है.

वहीं, इससे पहले अभ्यर्थियों ने उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के घर के बाहर भी प्रदर्शन किया था. लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई. जिसके बाद बीते 5 जुलाई को उन्होंने बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी के आवास के बाहर भी प्रदर्शन किया था. इस दौरान उन्होंने कहा कि विभाग में 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित 18,598 पदों पर पूरी पारदर्शिता के साथ भर्ती की गई है, लेकिन कुछ शरारती तत्व और राजनीतिक दल युवाओं को बरगला कर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से किसी भी विभाग में भर्ती के लिए जिन नियमों के तहत आवेदन मांगे जाते हैं, उन्हीं के तहत पूरी भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसे न भर्ती प्रक्रिया के दौरान बदला जा सकता है और न ही भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद।

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– The Political Mantra