September 24, 2021

लॉकडाउन के बीच बिहार का असली दर्द

Aara, Bihar

बिहार के आरा में कोरोना के कारण लॉकडाउन के चलते भूख मिटाने के लिए सड़कों पर अनाज चुन रहे है.

Aara, Bihar

“देश के भविष्य के खातिर जिनको  स्कूलों में होना था,
बेवसी के शिकार उनको सड़कों पर दाना चुनते देखा है।”

ये है बिहार का वास्तविक दृश्य…
हाँ वही बिहार जो कभी विश्व प्रसिद्ध नालंदा और तक्षशिला जैसे शिक्षण संस्थानों का संरक्षक और द्योतक रहा है, जो भारतीय इतिहास में ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और गौरवगाथा में सबसे समृद्ध रहा है। जो भगवान गौतम बुद्ध और महावीर स्वामी की जन्म और कर्म स्थली रही है। जो सीता माता की जन्मस्थली रही। जहाँ सिखों के दशवे गुरु गोविद सिंह का जन्म हुआ। जहाँ सम्राट जरासंध ,अशोक, अजातशत्रु, बिम्बिसार जैसे राजाओं का जन्म हुआ। जहाँ आज़ाद भारत के प्रथम राष्टपति डॉक्टर राजेंद्र प्रशाद का जन्म हुआ।

ऐतिहासिक रूप से इतने समृद्ध होने के बावजूद आजादी के 73 सालों के बाद भी वर्तमान में अगर बिहार की सही दिशा व दशा का अनुमान लगाना हो तो इस उपरोक्त चित्र के जरिये आसानी से लगाया जा सकता है।
ये चित्र बिहार के आरा जिले का है। जो कि यह प्रमाणित करती है कि यहाँ की सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक स्थिति कितनी दयनीय है।

यदि इंसानियत के तौर पर भावनात्मक रूप से एक बार आप सोचें कि, जिन मासूमों को इस उम्र में स्कूलों में होना चाहिए, अपना भविष्य बनाना चाहिए, वो इसकदर बेवसी और भुखमरी के शिकार होकर इस तरह सड़कों पर अनाज क्यों चुन रहे हैं? और ऐसे में जब पूरे देश में कोरोना वायरस महामारी के चलते लॉकडाउन घोषित किया गया हो, तब ऐसे में मासूमों, गरीबों, अनाथों के जीविका पर संकट खड़ा होना लाजमी है।

यह मात्र एक चित्र नहीं है बल्कि यह बिहार के उस दर्द को बयां करती एक ऐसी पहेली है, जिसे बिहार सरकार अभी तक नहीं सुलझा पायी है। ये बिहार के उन हजारों-लाखों असहाय लोगों की अनसुनी कहानी है जिसे सरकार देख कर भी अनसुना कर देती है।

आखिर क्या कारण है कि स्देश का अहम अंग रहने वाला बिहार आज ‘बीमारू’ राज्यों में गिना जाता है। क्यों
बिहार की गलियां ऐसे मोड़ से गुजर रहीं हैं जिससे ऐसा लगता है जैसे विकास की नैय्या आधे भंवर में डूबती प्रतीत हो रही है? ऐसी स्थिति राज्य के विकास में एक कलंक की तरह है और आने वाले भविष्य पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है।

आखिर बिहार की ऐसी स्थिति क्यों हुई…? आइये एक नजर डालते हैं इसके मुख्य कारणों पर-

जब आप बिहार के गलियारों में जाकर वहां की सामाजिक स्थितियों का गहनता से अवलोकन करेंगे तब आपको पता चलेगा कि यहां की जमीनी हकीकत कुछ और ही राज छुपाये हुए है जो ऐसे दर्द को बयां करती है जिसे सुनकर आप भी दाँतों तले अंगुली दबाने पर मजबूर हो जाएंगे।
तब आपको पता चलेगा कि किस तरह से ओछी राजनीति और भ्रष्टाचार के कारण बिहार भारत के सबसे गरीब और पिछड़े राज्यों में से एक हो गया है। यहाँ का प्रशासनिक सिस्टम ही ऐसा है कि नीचे से लेकर ऊपर तक हर कोई भ्रष्टाचार के रंग में रंगा हुआ है।
कुछ लोग आर्थिक रूप से मजबूत होने के कारण रंगदारी दिखाते हैं और लोगों को परेशान कर अपना काम निकालते हैं और इसी में वो अपनी शान समझते हैं।
वैसे तो बेरोजगारी पूरे देश में है। लेकिन यहां की सबसे बड़ी समस्या कह सकते हैं, जिसके कारण लोग पलायन करने पर विवश हो जाते हैं। जिसकी वजह से यहां की अधिकतर जनसंख्या दूसरे राज्यों में खानाबदोश जीवन जीने पर विवश हो जाती है।
यहां की दूसरी सबसे बड़ी समस्या है गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा, जो कि पूरे देश की समस्या है। गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा नहीं मिल पाने की वजह से बच्चों का भविष्य संकट के घेरे में आ जाता है। और मजबूरन उनको अपनी रोजी-रोटी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है।
भूख का दर्द कोई भी बर्दाश्त नहीं कर सकता ऐसे में चाहे कुछ भी करना पड़े इंसान करने पर विवश हो जाता है, फिर वो तो ठहरे मासूम।

वहीं सरकार और प्रशासन इन हालातों को देख कर भी अनदेखा कर देती है और समय आने पर बड़े-बड़े वादे कर, लालच देकर उन्हीं जनता के वोट से अपनी रोटी सेंकती है और अंत में ठेंगा दिखा देती है।
ऐसा ही चलता आया है। स्वतंत्रता के पश्चात अभी तक ऐसा कोई राजनेता या राजनायक नहीं आया जो उनके दुःख-दर्द समझ सके और उन्हें दूर कर सके।
अशिक्षा, जागरूकता की कमी, बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था, भ्रष्टाचार, रंगदारी आदि ये ऐसी समस्याएं हैं जिसकी वजह से और भी कई सामाजिक समस्याएं जन्म ले लेती हैं जो कि एक कुप्रथा का रूप ले लेती हैं जिसका हल निकालने में काफी समय लग जाता है।

अगर बिहार के इस दर्द को मिटाना है और इन बड़ी समस्याओं का समाधान पाना है, तो सबसे पहले इस सिस्टम को बदलना पड़ेगा। जनहित में अच्छे कदम उठाने पड़ेंगे और बच्चों के लिए गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की व्यवस्था करनी होगी। साथ ही वेरोजगारी और पलायन जैसी बड़ी समस्या को रोकने के लिए राज्य में रोजगार के साधन उपलब्ध कराने होंगे।
ओछी राजनीति की अवधारणा को बदलना होगा और राज्य के विकास में अहम् कदम उठाने होंगे। साथ ही भ्रष्टाचार को ख़त्म कर ईमानदारी की बीज बोनी होगी।
तभी राज्य को उसका पुरातन स्तित्व, पुरानी समृद्धि वापस मिल पाएगी।

क्योंकि,
संस्कृति चाह रही सज्जन को शौर्यवान बनना होगा,
मानवता की रक्षा हेतु हमें खुद को गढ़ना होगा।
राष्ट्र के उद्धार के लिए हमें संग मिलके चलना होगा।

– दुर्गेश बहादुर प्रजापति