September 25, 2021

दिल्ली की तस्वीर राजतंत्र के हवाले (Delhi election analysis ) – दुर्गेश बहादुर प्रजापति

Delhi Election

दिल्ली की तस्वीर राजतंत्र के हवाले

देश की नजरें दिल्ली विधानसभा चुनाव पर टिकी हुई हैं.
बीजेपी हो, कांग्रेस हो या आम आदमी पार्टी हो हर कोई अपनी दांव पेंच से दिल्ली की सत्ता हथियाना चाहता है. सभी पार्टियां दिल्ली की गद्दी पर बैंठने के लिए अपनी ओर से हर प्रपंच अपनाकर चोटी तक का जोर लगाए हुए हैं तो वहीं तोनों पार्टियां एक दूसरे को नीचा दिखाकर लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर वोट बटोरने में लगी हुई हैं.

बता दें कि 8 फ़रवरी को दिल्ली विधानसभा का चुनाव संपन्न होना है और 11 फ़रवरी को रिजल्ट आना हैं.
वहीं दिल्ली में कुल 70 सीटों पर चुनाव होना है और 36 सीटों पर बहुमत साबित होनी है. जहां कुल 1.46 करोड़ वोटर हैं, जिसमें 80.55 लाख पुरुष और 66.35 लाख महिला हैं.

ऐसे में देखना ये है कि इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में कौन मारता है बाजी, कौन हथिया पाता है दिल्ली की गद्दी.
लेकिन वहीं, जिसतरह से दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीति की जा रही है उसे देखते हुए बस यही अनुमान लगाया जा सकता है कि यह देश राजतंत्र का गुलाम हो गया है. यहां सब राजनीति के आड़ में जनता को मूर्ख बना कर किसी न किसी रूप में देश को लूटने का काम कर रहे हैं.
आज जब देश तमाम समस्याओं से जूझ रहा है और हर कोई देश के राजनीति से परेशान हैं तो प्रश्न ये उठता है कि यह देश किसके भरोसे विकास करेगा, किसके भरोसे आगे बढ़ेगा.

अगर एक नजर आप देश के वर्तमान स्थिति पर डालें तो पता चलेगा कि जिन लोगों के हाथ में देश का कमान है, वही देश के नागरिकों को बेवकूफ बनाकर वोट की राजनीति करके अपनी रोटी सेंक रहे हैं.
आज देश का हर नागरिक परेशान है, कोई बेरोजगारी की मार से रो रहा है तो कोई मंहगाई की मार से. वहीं देश का युवा जो आने वाले कल का भविष्य है, वही आज दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है.
हर तरफ विभिन्न तरह की परेशानियों की मार झेल रही जनता देश के सत्ता धारी लोगों से उम्मीद लगाए बैठी है कि कब उन्हें एक अच्छा नेता मिलेगा और कब उनकी परेशानियां दूर होंगी. लेकिन आज जिस तरह से बेरोजगारी बढ़ती जा रही है, मंहगाई चरम पर है, भ्रष्टाचार ने लागों को अपंग कर दिया है, आर्थिक मंदी से चहुओर निराशा की धुंधी फैली हुई है, उसे देखकर बस ये कहा जा सकता है कि कहीं न कहीं ये भारत अपनी राह से भटक गया है, अपने मंजिल से भटक गया है.
ऐसे में देश के बच्चों को ना ही अच्छी शिक्षा मिल पा रही है, ना ही युवाओं को उनकी मंजिल और उनका भविष्य नजर आ रहा है. हर तरफ राजनीति के शिकार हो रहे लोग राजनेताओं से आस लगाए बैठे हैं कि, कोई आए और उनके दुःख-दर्द दूर कर दे.

अब ऐसे में देश आगे बढ़े तो कैसे…विकास करे तो कैसे…

दिल्ली और देश की निगाहें इस चुनाव के नतीजों पर आँख गड़ाए बैठी हैं.
अब नतीजों के आधार पर यह तय होगा कि दिल्ली का भविष्य आने वाले पांच सालों में क्या होगा, विकास का पहिया किस ओर दौड़ेगा ?

क्या आने वाली सरकार दिल्ली की जनता के भरोसे पर काबिज हो पायेगी? क्या आने वाला समय दिल्ली के लिए खुश गवार हो पायेगा या फिर से लोग अगले विधान सभा चुनाव की राह ताकेंगे.

– दुर्गेश बहादुर प्रजापति