सरकार की हार, किसानों की जीत

पीएम मोदी की बड़ी घोषणा : 9 अगस्त, 2020 से शुरू होकर एक साल से अधिक समय तक संघर्ष करते हुए किसान आंदोलन ने अचानक नया मोड़ ले लिया, जब आज सुबह यानी 19 नवंबर 2021 को कार्तिक पूर्णिमा- गुरु नानक देव के प्रकाश पर्व पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में देश के किसानों से माफी मांगते हुए तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की बड़ी घोषणा की।

वहीं अब इस फैसले पर देश भर से तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कोई इसे सरकार की हार बता रहा है, तो कोई इसे किसानों, अन्नदाताओं की जीत बता रहा है, जो इतने समय से अपना घर-द्वार छोड़ सड़कों पर ठोकरें खाने को मजबूर थे, कोई इसे आने वाले विधानसभा चुनाओं को देखते हुए राजनीति से प्रेरित बता रहा है।

हालांकि, अब एक बड़ा प्रश्न यह उठता है कि अगर सरकार को इन कानूनों को वापस लेना था, तो पहले क्यों नहीं ली। एक साल से अधिक समय से चले अब तक के इस सबसे बड़े आंदोलन में 700 से ज्यादा किसानों की जानें गईं और किसानों का, देश का न जाने कितना नुकसान हुआ, क्या उसकी भरपाई सरकार कर पायेगी? इन जीवनदाता किसानों को इस आंदोलन के कारण ही न जाने कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, चाहे सर्दी हो, गर्मी हो या बरसात हो सड़कों पर गुजारनी पड़ी। देशद्रोही, आतंकवादी, उपद्रवी जैसे नामों से संबोधित किया गया। गाड़ी से कुचला गया। क्या अन्नदाता का ये अपमान वापस हो पाएगा?
कुछ भी हो पर किसानों के हित में इस फैसले से आगामी चुनाव के नजरिए से बीजेपी सरकार को उम्मीदें जरूर बढ़ गई हैं, जब कुछ ही महीनों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब समेत पांच राज्यों में विधान सभा का चुनाव है और सरकार देश भर में किसानों के विरोध का सामना कर रही है।
इस फैसले को बीजेपी का मास्टर स्ट्रोक भी कहा जा रहा है क्यों कि देश भर में महंगाई, बेरोजगारी, कृषि कानूनों के विरोध का सामना कर रही इस सरकार को किसानों के समर्थन के बिना चुनाव जीतना मुश्किल था, वहीं अब यह रास्ता साफ होता नजर आ रहा है।
यह फैसला 2024 के चुनाव के नजरिए से भी काफी अहम है, क्योंकि अगर इन राज्यों में 2022 का चुनाव बीजेपी जीत जाती है तो उसके लिए 2024 का रास्ता काफी हद तक साफ हो जाएगा।
वहीं, अब इस बड़ी खुशी के मौके पर देश भर के किसान एक दूसरे को मिठाइयां खिला रहे हैं और इस बड़ी जीत पर नाच-गाकर खुशियां मना रहे हैं। वास्तव में अन्नदाता किसानों के हित में यह एक बड़ा फैसला है।
-Durgesh Bahadur Prajapati