समाज के रक्षक ही बने भक्षक …?

ये है यूपी सरकार और यूपी की पुलिस जो इतने हद तक गिर सकती है कि कोई सोच भी नहीं सकता। जो यूपी में क्राइम ख़त्म करने के उदाहरण पेश करती है, अगर उसी की मांद में ही क्राइम पलता हो तो फिर जनता क्या ही आस रखेगी इस पुलिस प्रशासन से। जो जनता के सेवक और कानून के रक्षक कहे जाते हैं, अगर वही उनके भक्षक बन जाएं तो इतने बड़े सूबे के शासक और कानून व्यवस्था पर प्रश्न उठना लाज़मी है।
और ये कोई पहली बार नहीं है जब देश व प्रदेश के पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगे हैं और प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा होना पड़ा है, इससे पहले भी कई ऐसी घटनाएं और मामले सामने आए हैं, जब देश की पुलिस और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं और देशभर की निगाहें आकर्षित की हैं।
चाहे वह हाथरस कांड में पीड़िता का शव जलाने का आरोप हो या फिर 2018 में नोएडा की फर्जी एनकाउंटर की घटना हो जिसमें सेक्टर-122 के चौकी इंचार्ज विजय दर्शन शर्मा ने अपने दो पुलिस कर्मियों के साथ जिम ट्रेनर जितेंद्र यादव की गर्दन में उस समय गोली मार दी थी जब वो एक सीएनजी पम्प पर अपनी कार में सीएनजी गैस भरवा रहे थे। जितेंद्र अपने दोस्तों के साथ स्कार्पियो से बहन की सगाई समारोह से लौट रहे थे। इसके बाद नोएडा पुलिस पर फेक एनकाउंटर का आरोप लगा था।

या फिर सितंबर, 2018 में लखनऊ के गोमतीनगर की सबसे चर्चित एनकाउंटर की घटना हो, जिसमें एप्पल कम्पनी एरिया मैनजेर विवेक तिवारी को पुलिसकर्मी प्रशांत चौधरी ने गोली मार दी थी, जिससे उसकी मौत हो गई थी। तब हत्यारोपी पुलिस कर्मी ने अपने बचाव में कहा था कि उसने अपनी जान की रक्षा के लिए गोली चलाई थी। ऐसी ही ना जाने कितनी और भी घटनाएं हैं जो पुलिस प्रशासन और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
वहीं आज एक बार फिर जिसतरह से गोरखपुर में पुलिस की बर्बरता ने व्यापारी मनीष गुप्ता की जान ली है, वह सिर्फ देश के सबसे बड़े सूबे, यहां की सरकार, यहां की कानून व्यवस्था, यहां की पुलिस प्रशासन की ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र पर भी बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
यह एक गंभीर विषय है और सोचने वाली बात है, कि जो समाज और कानून के रक्षक हैं, वही आए दिन समाज और आम लोगों के साथ ऐसे बर्बरतापूर्ण अपराध क्यों करते हैं…?

-Durgesh Bahadur Prajapati