September 24, 2021

अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन ने भारतीय विदेश मंत्री से की मुलाकात, बोले- भारत से रिश्ते मज़बूत करना चाहता है अमेरिका

National News: अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन अपने दो दिवसीय भारत की यात्रा पर हैं। बुधवार को यात्रा के दौरान उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एनएसए अजीत डोभाल से मुलाकात की।
इस मुलाकात के दौरान कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इस बैठक के बाद ब्लिंकन और जयशंकर ने एक प्रेसवार्ता की। जहां ब्लिंकन ने कहा कि मैं उस काम की गहराई से सराहना करता हूं जो हम एक साथ करने में सक्षम हैं और जो काम हम आने वाले महीनों में एक साथ करने जा रहे हैं।

बता दें कि विदेश मंत्री बनने के बाद ब्लिंकेन का ये पहला भारत दौरा है और इस वर्ष जनवरी में बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद से भारत आने वाले वो तीसरे बड़े अमेरिकी अधिकारी हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार अपने दौरे में ब्लिंकेन को भारत के साथ जिन मु्द्दों पर चर्चा करनी थी उसमें अफ़ग़ानिस्तान में शांति और स्थिरता क़ायम करने का मुद्दा भी शामिल है।

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने अपनी भारत यात्रा में कुछ ऐसा किया है, जिससे चीन को मिर्ची लग सकती है। बुधवार को ब्लिंकन ने दिल्ली में तिब्बत के धर्मगुरु दलाई लामा के एक प्रतिनिधि मंडल से मुलाकात की।
इस दौरान उन्होंने कहा कि सिविल सोसाइटी के नेताओं से मिलकर मुझे खुशी हुई। भारत और अमेरिका हमेशा से लोकतंत्र समर्थक रहे हैं। यह हमारे संबंधों का आधार भी है। इसके साथ ही उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की।

एस जयशंकर से मुलाकात के बाद बोले- संबंधों को और मजबूत करेंगे
इससे पहले ब्लिंकन ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बाइडन की सरकार भारत के साथ संबंधों को और मज़बूत बनाते रहने को लेकर संकल्पबद्ध है।
ब्लिंकन ने कहा कि मैं उस काम की गहराई से सराहना करता हूं जो हम एक साथ करने में सक्षम हैं और जो काम हम आने वाले महीनों में एक साथ करेंगे।

उन्होंने कहा कि ऐसी कोई चुनौती नहीं है, जिसका हमारे नागरिकों के जीवन पर असर न हो, चाहे वह कोरोना हो, उभरती टेक्नोलॉजी का बुरा प्रभाव हो। इन समस्याओं से कोई भी देश अकेले नहीं निपट सकता। दोनों देशों के बीच पहले से कहीं अधिक सहयोग की जरूरत है।
वहीं, अफगानिस्तान के मुद्दे पर ब्लिंकन ने भारत के साथ काम करने की इच्छा जाहिर की है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान से सेना वापस बुलाने के बाद भी हम वहां के लोगों के हित के लिए काम करते रहेंगे। हम इलाके में शांति स्थापित करना चाहते हैं।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि दुनिया में कुछ ही संबंध ऐसे हैं जो अमेरिका और भारत के बीच के रिश्ते से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। हम दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और हमारी विविधता हमारी राष्ट्रीय शक्ति को और बढ़ाती है।
उन्होंने कहा कि हम विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। भारत और अमेरिका के नागरिक अपने लाखों की संख्या में मौजूद पारिवारिक संबंधों और अपने साझा मूल्यों के माध्यम से एकजुट हैं।

इसके अलावा ब्लिंकन ने कहा कि भारत में वापस आकर खुशी हो रही हैं। मैं यहां 40 साल पहले अपने परिवार के साथ आया था। उन्होंने कहा कि कोविड-19 ने दोनों देशों को बुरी तरह से प्रभावित किया है। महामारी की शुरुआत में भारत की ओर से जो मदद हमें मिली उसे हम कृतज्ञता के साथ याद करते हैं। मुझे गर्व है कि हम भारत की मदद कर सके। इसके साथ ही हम इस जानलेवा महामारी को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

वहीं, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि एशिया-प्रशांत में शांति और संपन्नता हम दोनों देशों के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी अफ़ग़ानिस्तान में स्थिरता। क्वाड को आपसी सहयोगी का मंच बनाना हमारे आपसी हित में है और हमें आतंकवाद जैसी समकालीन चुनौतियों पर और क़रीबी से आकर काम करना चाहिए।
प्रेसवार्ता में डॉ. जयशंकर ने कहा कि आज हमने टीका उत्पागन को बढ़ाने पर चर्चा की जिससे इसे पूरी दुनिया में कम कीमत पर और आसानी से हर कहीं उपलब्ध कराया जा सके।
उन्होंने भारत में टीका उत्पादन के लिए कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला जारी रखने के लिए बाइडन प्रशासन को धन्यवाद दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर के दौरान हमें अमेरिका से जिस तरह का सहयोग मिला वह सच में असाधारण है।

-The Political Mantra Team