September 25, 2021

29_July_INTERNATIONAL_TIGER_DAY: विश्व बाघ दिवस पर विशेष

29_July_INTERNATIONAL_TIGER_DAY: 29 जुलाई को हर साल विश्व बाघ दिवस मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने की शुरुआत बाघ संरक्षण के काम को प्रोत्साहित करने, उनकी घटती संख्या के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए की गई थी. साल 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित एक शिखर सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने की घोषणा की गई थी. इस सम्मेलन में मौजूद विभिन्न देशों की सरकारों ने 2022 तक बाघों की आबादी को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया था.

बाघ भारत का राष्ट्रीय पशु है. यह देश की शक्ति, शान, सतर्कता, बुद्धि और धीरज का प्रतीक माना जाता है. यह भारतीय उपमहाद्वीप में उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र को छोड़कर पूरे देश में पाया जाता है. चिंता की बात ये है कि बाघ को वन्यजीवों की लुप्त होती प्रजाति की सूची में रखा गया है. लेकिन राहत की बात ये है कि ‘सेव द टाइगर’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों की बदौलत देश में बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है.

इस दिवस को मनाने का महत्व:

बाघों की लुप्त होती प्रजातियों की ओर ध्यान आकर्षित करने, उनकी रक्षा करने और बाघों के पारिस्थितिकीय महत्व बताने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जाता है.

वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2017 में 116 और 2018 में 85 बाघों की मौत हुई है. 2018 में हुई गणना के अनुसार बाघों की संख्या 308 है. साल 2016 में 120 बाघों की मौतें हुईं थीं, जो साल 2006 के बाद सबसे ज्यादा थी. वहीं, साल 2015 में 80 बाघों की मौत की पुष्टि की गई थी. इस दिवस के जरिए बाघ के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है.

अगर भारत की बात करें तो मध्यप्रदेश को बाघों का प्रदेश कहा जाता है. पिछ्ले कुछ सालों से मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या निरंतर बढ़ रही है. मध्यप्रदेश में कुल 526 बाघ हैं, जो देश में सर्वाधिक है. मध्य प्रदेश ने 2011 में प्रतिष्ठित ‘टाइगर स्टेट’ का दर्जा खो दिया था और कर्नाटक पहले स्थान पर आ गया था.
वहीं 2018 की रिपोर्ट के अनुसार कर्नाटक 524 बाघों के साथ दूसरे स्थान पर है. इसके बाद उत्तराखंड 442 है. इसके अलावा वन विभाग की आंतरिक गिनती में प्रदेश के टाइगर रिजर्व में वर्ष 2018 की तुलना में औसतन पांच से 60 फीसद तक बाघ बढ़ गए हैं.
ये आंकड़े भरोसा दिलाते हैं कि मध्य प्रदेश देश में सबसे ज्यादा बाघ वाले राज्य (टाइगर स्टेट) के रूप में पहचान कायम रखेगा. प्रदेश के पांच नेशनल पार्क, 24 अभयारण्य और 63 सामान्य वनमंडलों में दो साल में सौ से ज्यादा बाघ बढ़े हैं. इसके अलावा 45 से ज्यादा शावक हैं, जो अगले साल गिनती शुरू होने तक एक वर्ष की उम्र पार कर लेंगे और गिनती में शामिल हो जाएंगे.

इसलिए बढ़ रही बाघों की संख्या-

विशेषज्ञों के मुताबिक प्रदेश के जंगल बाघों के लिए मुफीद हैं. यहां पर्याप्त खाना और पानी है. खासकर संरक्षित क्षेत्रों (नेशनल पार्क, टाइगर रिजर्व) में सुरक्षा के भी पूरे इंतजाम हैं. इसलिए यहां बाघ तेजी से बढ़ रहे हैं.
पिछले एक दशक में कान्हा, पन्ना, पेंच, सतपुड़ा और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से सैकड़ों गांव विस्थापित किए गए हैं. ये क्षेत्र अब घास के मैदान में तब्दील हो गए हैं, जिससे चीतल, सांभर, नीलगाय, चौसिंघा की संख्या बढ़ी है और इन्हीं पर निर्भर बाघ भी बढ़े हैं.

2018 की तुलना में कहाँ कितने बाघ (स्त्रोत- वन विभाग रिपोर्ट)

संजय डुबरी नेशनल पार्क में 2018 की तुलना में 8 बाघों में वृद्धि हुई है. अब वहां कुल 13 बाघ हैं.

सतपुड़ा नेशनल पार्क में 5 कई वृद्धि के साथ अब कुल 45 बाघ हैं.

पेंच नेशनल पार्क में 3 बाघों की वृद्धि के साथ अब कुल 64 बाघ हैं.

कान्हा नेशनल पार्क में 30 बाघों की वृद्धि के साथ अब कुल 118 बाघ हैं.

पन्ना नेशनल पार्क में 17 बाघों की वृद्धि के साथ अब कुल 42 बाघ हैं.
बांधवगढ़ नेशनल पार्क में 40 बाघों की वृद्धि के साथ अब कुल 164 बाघ हैं.

अब वन संरक्षण में आदिवासी भी आगे-

बालाघाट में आदिवासियों की संख्या अधिक है. पहले यही आदिवासी नक्सलियों की बातों में आकर वन्य जीवों का शिकार करते थे, पर अब वन संरक्षण संस्था अनेक वन्यजीव वेलफेयर से सम्बंधित लोगों के द्वारा आदिवासी को जागरूक किया गया जा रहा है. उन्हें बताया गया कि वन्य जीवों के शिकार से सिर्फ उनको ही नहीं उनके पूरे परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ता है. जेल भी जाना पड़ता है. रोजगार खत्म हो जाता है.
जिसके बाद से अब आदिवासी मिलकर वन की सुरक्षा करते हैं. जिसके बदले में वन प्रशासन उन्हें अचार, शहद, वन संबंधी बाजार उपलब्ध कराते हैं, जिसे आदिवासी बिना किसी बिचौलिये के सीधे तौर पर बेचकर अपनी जीविका चलाते हैं.
इससे उन्हें अब रोजगार मिल रहा है और आदिवासी अब खुश भी हैं. इसका फायदा वन्यजीवों को हो रहा है और इस तरह जंगल के आसपास के वातावरण में बदलाव बाघों की संख्या में वृद्धि की मुख्य वजह बनकर सामने आ रहा है.

– The Political Mantra Team