September 24, 2021

New cabinet mega change in modi era

पीएम मोदी के साम्राज्य का सबसे बड़ा बंटवारा, किन नए चेहरों को मिली जगह, जानिए किसको मिला कौन सा विभाग,

पीएम नरेंद्र मोदी ने बुधवार यानी 7 जुलाई को कैबिनेट का सबसे बड़ा विस्तार किया. इस दौरान 43 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई, जिनमें 36 नए चेहरे शामिल हैं. वहीं, 7 महिलाएं भी शामिल हैं.
सभी 43 नेताओं में 15 को कैबिनेट मंत्री बनाया गया, जिनमें नारायण राणे, ज्योतिरादित्य सिंधिया और सर्बानंद सोनोवाल आदि शामिल हैं. बाकी 28 नेताओं को राज्य मंत्री की शपथ दिलाई गई. शपथ ग्रहण के दो घंटे बाद ही सभी मंत्रियों को उनके प्रभार बांट दिए गए.

बता दें कि मोदी सरकार के 8 साल के कार्यकाल में पहली बार कैबिनेट में 12 महिलाएं मंत्री हैं. 2014 के दौरान मंत्रिमंडल में पहली बार सात महिलाएं थीं, जबकि 2019 में सिर्फ 6 महिलाएं मंत्री थीं. नए मंत्रियों में सबसे ज्यादा 7 नेता उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं. वहीं गौर करने वाली बात यह है कि अब पीएम मोदी के मंत्रिमंडल में कुल 77 मंत्री हो गए हैं. संसद में अधिकतम मंत्री 81 हो सकते हैं. ऐसे में अब भी 4 पदों की गुंजाइश बाकी रह गई है.

कुल मिला कर इस बार के मंत्रिमंडल में 36 नए मंत्री शामिल हुए हैं, 7 पुराने मंत्रियों का प्रमोशन हुआ है और 12 मंत्रियों ने इस्तीफा दिया है.

मंत्रिमंडल के इस बंटवारे में सबसे बड़ी खबर है, देश के चार बड़े मंत्रियों का इस्तीफा. इनमें स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन, कानून और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद, सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का नाम शामिल है.
यानी प्रधानमंत्री मोदी ने इस बार शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी और सूचना एवं प्रसारण जैसे बड़े मंत्रालयों में भारी फेरबदल किए हैं.

नए मंत्रियों को बांटे गए विभाग-

अमित शाह को मौजूदा मंत्रालयों के साथ नए बने सहाकारिता मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

पीयूष गोयल से रेल मंत्रालय वापस ले लिया गया. अब वह वाणिज्य, उद्योग और कपड़ा मंत्रालय संभालेंगे.

अश्विनी वैष्णव अब रेल और सूचना प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालेंगे.

स्मृति ईरानी को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के साथ-साथ स्वच्छ भारत मिशन की जिम्मेदारी भी दी गई है.

ज्योतिरादित्य सिंधिया को नागरिक उड्डयन मंत्रालय की कमान दी गई है.

किरन रिजिजू को खेल मंत्रालय से हटाकर संस्कृति मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया.

अनुराग ठाकुर को खेल और युवक कल्याण मंत्रालय का जिम्मा दिया गया है.

सर्बानंद सोनोवाल को आयुष मंत्रालय के साथ-साथ उत्तर-पूर्व के मामलों की भी जिम्मेदारी दी गई.

पुरुषोत्तम रूपाला डेयरी और फिशरीज मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालेंगे.

गिरिराज सिंह को ग्रामीण विकास मंत्रालय की देख-रेख की जिम्मेदारी दी गई है.

भूपेंद्र यादव को श्रम और पर्यावरण मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है.

धर्मेंद्र प्रधान को पेट्रोलियम मंत्रालय से हटाकर शिक्षा मंत्रालय सौंपा गया.

हरदीप सिंह पुरी से नागरिक उड्डयन मंत्रालय लेकर पेट्रोलियम, शहरी विकास और आवास मंत्रालय दिया गया.

पशुपति पारस को खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई.

12 मंत्रियों ने दिया इस्तीफा, जानिए इसके पीछे का कारण

पहली बड़ी बात ये कि 12 मंत्रियों ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया और इनमें चार बड़े नाम ऐसे हैं, जो कैबिनेट में थे. इनमें पहले हैं डॉक्टर हर्षवर्धन, जिनकी उम्र 66 साल है.
दूसरे हैं रवि शंकर प्रसाद, जिनकी उम्र भी 66 साल है. तीसरे हैं प्रकाश जावड़ेकर, जिनकी उम्र 70 साल है और चौथे हैं रमेश पोखरियाल निशंक, जिनकी उम्र 61 साल है. ये चार नेता अब मोदी कैबिनेट का हिस्सा नहीं है.

डॉ. हर्षवर्धन सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थे और पिछले डेढ़ वर्षों में उनका रोल सबसे महत्वपूर्ण था क्योंकि उनके कार्यकाल के दौरान देश ने कोरोना की पहली और दूसरी लहर से संघर्ष किया, लेकिन उनके इस्तीफे से ये बात स्पष्ट है कि सरकार उनके काम से खुश नहीं थी.

मंत्रिमंडल से हटाए गए दूसरे बड़े नेता हैं रवि शंकर प्रसाद, जो प्रधानमंत्री की कैबिनेट में कानून और आईटी मंत्री थे. उनके समय में आईटी मंत्रालय और टेक्नोलॉजी कम्पनियों के बीच विवाद हुआ और पिछले दिनों ट्विटर ने रवि शंकर प्रसाद का अकाउंट एक घंटे के लिए बंद भी कर दिया था और मंत्रिमंडल से उन्हें हटाने का संदेश स्पष्ट है कि सरकार उनके भी काम से खुश नहीं थी.

इसके बाद इनमें तीसरा बड़ा नाम है प्रकाश जावड़ेकर का. उनके पास दो बड़े मंत्रालय थे, सूचना प्रसारण मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय. सूचना प्रसारण मंत्रालय ने ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर गालियों को ग्लैमराइज करने, हिंसा दिखाने और अश्लीलता को रोकने के लिए इसी साल 25 फरवरी को नई गाइडलाइंस बनाई थी और तब उनके साथ रवि शंकर प्रसाद आईटी मंत्री की हैसियत से टेक क​म्पनियों के लिए नए दिशा-निर्देश लाए थे, लेकिन इन दोनों नेताओं को हटा दिया गया और इससे ये पता चलता है कि जिस तरीके से टेक कम्पनियों और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को हैंडल किया गया, उससे सरकार खुश नहीं थी.

प्रकाश जवाड़ेकर को मंत्रिमंडल से हटाने की एक और बड़ी वजह है सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार यानी बैड प्रेस को नहीं रोक पाना. सूचना प्रसारण मंत्री असल में सरकार का प्रवक्ता होता है और वो सरकार का पक्ष लोगों के बीच रखता है, लेकिन प्रकाश जावड़ेकर इस काम में सफल नहीं हुए.

चौथा बड़ा नाम है रमेश पोखरियाल निशंक का, जिनके पास शिक्षा मंत्रालय था. बताया जा रहा है कि उनके खराब स्वास्थ्य को देखते हुए सरकार ने ये जिम्मेदारी उनसे वापस ली है. लेकिन इसके पीछे बोर्ड परीक्षाओं का रद्द होना और दूसरे कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स का न हो पाना भी एक बड़ा कारण है.

बता दें कि पिछले कुछ महीनों से शिक्षा मंत्रालय का कामकाज प्रधानमंत्री मोदी खुद देख रहे थे और बोर्ड परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला भी उन्हीं की अध्यक्षता में लिया गया था. इसके अलावा शिक्षा मंत्रालय की बैठकों में भी रमेश पोखरियाल निशंक नहीं थे और पीएम मोदी बच्चों से संवाद कर रहे थे.

-The Political Mantra Team