September 24, 2021

भारत के लाल नीरज ने भाले से देश को दिलाया स्वर्ण पदक, क्या आप जानते हैं नीरज के असल जिंदगी की कहानी..

भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने भारत का एथलेटिक्स में ओलंपिक पदक जीतने का पिछले 121 साल का इंतजार खत्म कर दिया और ओलंपिक खेलों के इस महाकुंभ में भारत का नाम इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों में अमर कर दिया। नीरज की इस उपलब्धि पर पूरे देश में जश्न का माहौल है।

संभवतः 131 करोड़ भारतीयों की उम्मीदें एक भाले की नोक पर टिकी हुई थीं और वो थीं नीरज चोपड़ा के भाले पर।
सोने की तलाश में टोक्यो पहुंचे बजरंग पुनिया कांसे पर टिक गए थे। अदिति अशोक भी गोल्फ में बस मुहाने पर ठिठक गई थीं। हॉकी में महिलाओं के हौसले और पदक से कुछ दूर रह जाने के भावुक क्षणों में बहे आंसू सभी को नम कर चुके थे। 2008 में अभिनव बिंद्रा की बंदूक की नली से निकला सुनहरा पदक पिछले 13 साल से खुद को बहुत अकेला महसूस कर रहा था। उसके ऊपर करोड़ों भारतीयों की उम्मीदों का बोझ बढ़ता जा रहा था। इस भार को साझा करने की बेहतरीन कोशिश मीराबाई चानू ने की पर वो चांदी पर रुक गई। सिंधु की शटल से भी कांसा ही निकल पाया।

वहीं पहलवान रवि दहिया की सुनहरी उम्मीदें भी चांदी की चमक में बदल गईं। लवलीना के मुक्के से दमका कांसा सुकून भी दे रहा था और भविष्य की उम्मीद भी जगा रहा था। पर सोना तो सोना होता है। और सोने की चिड़िया रहे इस देश से बेहतर इसकी चमक को कौन समझ सकता है!! तमाम उपलब्धियों के बीच एक अजीब सी कसमसाहट बाकी थी। एक प्यास, खेलों के उस महाकुंभ में भारत के राष्ट्र गीत की धुन सुन लेने की प्यास, एक बेताबी अपने तिरंगे को सबसे ऊपर चढ़ते हुए देखने की।
जब दुनिया के हमसे छोटे देश ये कर सकते हैं, तो हम क्यों नहीं? ओलंपिक में एक समय हॉकी ने ही सोने के तमगों से माँ भारती का अभिषेक किया है। फिर व्यक्तिगत स्वर्ण पदक अभिनव बिंद्रा लेकर आए। लगा कि ये सिलसिला चल पड़ेगा। पर 13 साल लग गए अगले स्वर्ण तिलक के लिए।

क्रिकेट के दीवाने इस देश में किसी अभिनव बिंद्रा, दीपा करमाकर, मेरीकॉम, विजेंद्र, मीराबाई चानू, रानी रामपाल, गीता फोगाट, विनेश फोगाट, रवि दहिया, बजरंग पुनिया, लवलीना बोरगोहेन या अदिति अशोक को हम तभी जानते हैं जब वो ओलंपिक के इस विश्व मंच पर अंतिम आठ या अंतिम चार तक पहुँच कर हमारी उम्मीदों को जगा देते हैं। उसके पहले ये सभी और इनकी तरह के अनगिनत खिलाड़ी किन संघर्षों से गुजर रहे होते हैं, कैसे अपने सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे होते हैं, ये कोई नहीं जान पाता। ऐसी कितनी ही कहानियाँ हैं जो अनसुनी ही रह जाती हैं।  नीरज चोपड़ा ने मेहनत और संघर्ष की उन्हीं कहानियों को सुनहरी आवाज़ दी है।

नीरज चोपड़ा ने जीता पहला स्वर्ण

हरियाणा के पानीपत के गांव खंडरा के नीरज की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। अपने शरीर को मजबूत बनाने के लिए वो जिम जाते थे। जिम के बगल में ही स्टेडियम था। टहलते हुए अक्सर स्टेडियम पहुंच जाने वाले नीरज ने खेल-खेल में ही भाला उठाकर फेंका जो काफी दूर जा गिरा। वहीं मौजूद गुरु द्रोण समान एक कोच का आभार जो उन्होंने भविष्य के इस स्वर्ण पदक विजेता को पहचान लिया। नीरज को आगे इसी का प्रशिक्षण लेने की सलाह दी। फिर तो बस जैसे नीरज पर जुनून सवार हो गया। 2016 में ही वो जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड बना चुके थे, बस रियो जाने से चूक गए। 2018 में उन्होंने एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता।

टोक्यो ओलिंपिक के दौरान नीरज के चेहरे और चाल से जबर्दस्त आत्मविश्वास झलक रहा था। 7 अगस्त को अंतिम मुक़ाबले के पहले दौर में ही वो भाले की नोक से सुनहरा इतिहास लिख चुके थे। पहला थ्रो ही 87.03 मीटर पर जाकर गिरा। कोई उसके पास भी नहीं आ पाया था कि अगली बार उनका भाला 87.58 मीटर दूर जाकर गिरा। ये उनके अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 88.08 मीटर से कुछ कम था, पर सोना जिता देने के लिए काफी था। इसके बाद आखिर तक कोई भी खिलाड़ी 87.58 के करीब नहीं पहुंच पाया। जब नीरज ने ये दूसरा थ्रो फेंका था तो उनका आत्मविश्वास इतना जबर्दस्त था कि उन्होंने पलट कर भी नहीं देखा कि भाला कितनी दूर जा रहा है। वो बस विजयी मुद्रा में जोशीले उद्गार के साथ वापस आ गए। नीरज ने वो कर दिखाया, जिसके लिए हर भारतीय बेताब था।

अब आवश्यक ये है कि सोने का ये सफर अभिनव बिंद्रा और नीरज चोपड़ा के व्यक्तिगत जीवन और संघर्ष से ऊपर संस्थागत रूप ले। हम एक देश के रूप में खेलों को बेहतर तरीके से अंगीकार करें। किसी की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा को मंच देना, संस्थाओं के माध्यम से उसको विकसित करना तो आवश्यक है ही पर उससे भी ज्यादा जरूरी है ऐसी व्यवस्था कायम करना, जिसमें हम विश्व मंच पर छा जाने वाली पौध को पहचान कर, सींच कर, सही खाद-पानी देकर बड़ा करें। हर किसी में सोना जीतने की अदम्य भूख जगाएं। हर कोई अभिनव, नीरज, मीराबाई, रवि, बजरंग, सिंधु, या लवलीना बनना चाहे। तभी हम देश के द्वार पर सोने के पदकों का तोरण हार सजा पाएंगे। तभी हम सात पदकों से सत्तर पदकों तक का सफर तय कर पाएंगे।

नीरज के भाले से निकला ये स्वर्ण तिलक लंबे समय तक जगमगाता रहेगा, नए पदक विजेताओं को राह दिखाएगा और इसका संदेश नीरज के भाले से भी कई गुना दूर तक जाएगा। सभी भारतीय खिलाड़ियों और खास तौर पर नीरज चोपड़ा को बहुत बधाई!!

ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतने वाले नीरज देश के पहले खिलाड़ी-

नीरज ओलंपिक में ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतने वाले देश के पहले और व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी हैं। इससे पहले निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने बीजिंग ओलंपिक 2008 में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल में स्वर्ण पदक जीता था।

नीरज ने अपने पहले ही प्रयास में शानदार थ्रो किया और 86.65 मीटर दूर भाला फेंका। इसके साथ ही वह फाइनल के लिए क्वालीफाई कर गए। फाइनल में सीधे प्रवेश करने के लिए 83.50 मीटर का थ्रो होना जरूरी है। नीरज का व्यक्तिगत बेस्ट 88.06 मीटर है। इस थ्रो के साथ उन्होंने 2018 एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक जीता था।

87.86 मीटर भाला फेंक कर टोक्यो ओलंपिक के लिए किया था क्वालीफाई-

दाईं कोहनी की चोट से उबरने के बाद ही नीरज ने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था। चोट की वजह से नीरज कई महीने खेल से दूर रहे, लेकिन चोट से उबरने के बाद दमदार वापसी की। दक्षिण अफ्रीका में आयोजित एथलेटिक्स सेंट्रल नार्थ ईस्ट मीट में 87.86 मीटर भाला फेंक कर टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था। इससे पहले कोहनी में चोट की वजह से छह महीने उनका अभ्यास नहीं हो सका था।

88.07 मीटर का थ्रो कर बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड-

कोरोना के कारण करीब एक साल से ज्यादा की अवधि से प्रतिस्पर्धाओं से चोपड़ा दूर रहे, लेकिन मार्च में वापसी करते ही उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 88.07 मीटर का थ्रो करके नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बना दिया था। नीरज ने अपने ही पिछले नेशनल रिकॉर्ड को एक सेंटीमीटर से तोड़ दिया। उस समय जब नीरज से इस बारे में पूछा गया तो नीरज चोपड़ा ने कहा कि कोरोना महामारी ने ट्रेनिंग की तैयारियों को काफी प्रभावित किया, लेकिन उन्होंने अपनी ट्रेनिंग को प्रभावित नहीं होने दिया। मेहनत से तैयारी की।

वजन कम करने के लिए एथलेटिक्स ज्वाइन की थी-

24 दिसंबर 1997 को हरियाणा के पानीपत में जन्मे नीरज किसान परिवार से आते हैं। चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज से उन्होंने शिक्षा प्राप्त की है। उन्होंने वजन कम करने के लिए एथलेटिक्स ज्वाइन की थी। इसके बाद वह इसमें अच्छा करने लगे और कई टूर्नामेंट में जीत हासिल की। साल 2016 में उन्होंने भारतीय सेना में भर्ती हुए। इसके बाद उनके प्रदर्शन में निरंतरता आई है। इससे पहले नीरज के पास तैयारी के लिए पूरे उपकरण नहीं होते थे, लेकिन भारतीय सेना में सूबेदार होने के बाद उनकी तैयारी और भी अच्छी हो गई। 2016 में ही विश्व एथलेटिक्स अंडर-20 में उन्होंने पहला अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद नीजर ने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा। लगातार एक के बाद एक रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करते गए। बता दें कि अपनी थ्रोइंग स्किल्स को बेहतर बनाने के लिए नीरज ने जर्मनी के बायो मैकेनिक्स एक्सपर्ट क्लाउस बार्तोनित्ज से ट्रेनिंग ली है।

भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा

अब तक की उपलब्धि-

नीरज ने इससे पहले एशियन गेम्स 2018 जकार्ता स्वर्ण पदक, कॉमनवेल्थ गेम 2018 गोल्ड कोस्ट स्वर्ण पदक, एशियन चैंपियनशिप 2017 भुवनेश्वर स्वर्ण पदक, दक्षिण एशियाई खेल गुवाहाटी 2016 स्वर्ण पदक, वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप 2016 गोल्ड मेडल, एशियन जूनियर चैंपियनशिप 2016 रजत पदक जीत चुके हैं।

टोक्यो ओलिंपिक 2020 में भारत के लिए छह खिलाड़ियों ने व्यक्तिगत इवेंट तो वहीं हॉकी टीम ने फील्ड इवेंट में देश के लिए मेडल जीते। खेल के सबसे बड़े इवेंट में मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने ईनाम देने की घोषणा की। BCCI ने गोल्ड मेडल जीतने वाले जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा को जहां एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की तो वहीं भारतीय पुरुष हॉकी टीम को 1 करोड़ 25 लाख रुपये ईनाम के तौर पर देने का एलान किया। भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने फील्ड हॉकी में देश के लिए 41 साल के बाद ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने का कमाल किया था।
इसके अलावा BCCI ने दो खेलों में सिल्वर मेडल जीतने वाले एथलीट मीराबाई चानू और रवि कुमार दाहिया को बतौर ईनाम 50-50 लाख रुपये देने की घोषणा की है। मीरा बाई चानू ने वेटलिफ्टिंग में तो वहीं रवि कुमार दाहिया ने 57 किलो कैटेगरी में रेसलिंग में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीते।

इनके अलावा ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले तीन खिलाड़ियों पीवी सिंधू, लवलीना बोरगोहेन और बजरंग पूनिया को 25-25 लाख रुपये देने का एलान किया। पीवी सिंधू ने महिला एकल बैडमिंटन प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज मेडल जीता था तो वहीं लवलीना ने बॉक्सिंग में ये कमाल किया था। इसके अलावा बजरंग पूनिया ने फ्रीस्टाइल कुश्ती में 65 किलो भारवर्ग में भारत के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीता था।

राष्ट्रपति, पीएम मोदी समेत कई बड़े हस्तियों ने दी बधाई-

वहीं राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, पीएम मोदी समेत देश के कई बड़ें नेताओं और शख्सियतों ने नीरज चोपड़ा की इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा-
नीरज चोपड़ा की अभूतपूर्व जीत! आपने जैवलिन थ्रो में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया है। आपसे हमारे युवाओं को प्रेरणा मिलेगी। भारत उत्साहित है! हार्दिक बधाई!

नीरज चोपड़ा के भाले ने माँ भारती के भाल पर स्वर्ण तिलक किया है। ये देश के 131 करोड़ लोगों की आकांक्षाओं का सम्मान तो है ही, पर ये पदक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये भारत में खेलों को लेकर एक नई संस्कृति के विकास में बहुत महत्वपूर्ण योगदान देगा।
नमन है ऐसे महान खिलाड़ी को…